
Narendra
July 2, 2026
Impact
नॉर्वे को दुनिया में प्रेस फ्रीडम का नंबर 1 देश बताया जाता है।
Freedom House उसे 99/100 स्कोर देता है।
लेकिन जब नॉर्वेजियन पत्रकार Helle Lyng ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेस फ्रीडम, मानवाधिकार और फ्री स्पीच पर सवाल पूछे, तब सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हो गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार बाद में उनके Facebook और Instagram अकाउंट्स सस्पेंड होने की खबरें सामने आईं।
अब सवाल उठ रहा है —
अगर दुनिया का सबसे “फ्री” देश भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सवालों और कंटेंट कंट्रोल की बहस में फंस सकता है, तो क्या ग्लोबल फ्रीडम इंडेक्स पूरी सच्चाई दिखाते हैं?
आज के डिजिटल दौर में फ्री स्पीच सिर्फ सरकारों से नहीं, बल्कि टेक कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से भी प्रभावित होती है।
नॉर्वे में 2026 में लगभग 76% आबादी Facebook पर और करीब 50% आबादी Instagram पर मौजूद थी। ऐसे में किसी भी ऑनलाइन कार्रवाई का असर सीधे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी की बहस से जुड़ जाता है।
क्या प्रेस फ्रीडम की रैंकिंग वास्तविकता दिखाती हैं?
या सोशल मीडिया का नया दौर पूरी तस्वीर बदल चुका है?
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